बादल गरजते हैं बरसते हैंऔर नदियाँ बेहती हैंसूरज रोशनी और गर्मी देता हैहवायें सांस देती हैं और ख़ुशबू लाती हैधरती फसल देती हैकिसान खेती करता है उसकी रक्षा करता हैउसको काटता है हमें भेजता हैश्रामिक उसको हम तक पहुँचाता हैऔर दाने दाने पे लिखा हुआ है “खाने वाले” का नाम?…अगर कोई उस दाने को डालाContinue reading “(Hindi) 3. दाने दाने पे …”
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(Hindi) 2. उस रात के लिए …
बैठ बैठ कर अपने आप से करता हूं बात,जस्बात ही तो है उसकी सुबूत।सुकून बेच बेच के जीता हूं ये तन्हाई,पल पल जानता है उसकी गेहराई।मेरी है दो आंखें,जैसी ये दुनिया देखें।एक पूरब है एक पश्चिम,भाग न पाऊं, रस्ता है मुजरिम।खरीद लाया हूं कप तीन,जब आयेंगे दोनों तरफ से मेरी जान,बनाऊंगा चाय आधी रात में,घरकेContinue reading “(Hindi) 2. उस रात के लिए …”
(Hindi) 1. अंदाज़ अपना अपना!
जो बरसती नहीं वो बादल किस लिए?जो अंकुरण नहीं हो सकती वो बीज किस लिए?जो देख नहीं सकते वो खूबसूरती किस लिए?जो सुन नहीं सकते वो ग़ज़ल किस लिए?जो बैठ नहीं सकते वो मेहफिल किस लिए?जो आजमा नहीं सकते वो जज़्बात किस लिए?जो निभा नहीं सकते वो रिश्ते बनाना किस लिए?जो दूर नहीं रह सकतेContinue reading “(Hindi) 1. अंदाज़ अपना अपना!”